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Suicide Poem | By Hariram Regar

 आत्महत्या  क्या विषाद था तेरे मन में? क्यों लटक गया तू फंदे पर? जो औरों को कन्धा देता, क्यों आज है वो पर कंधे पर? क्या गिला रहा इस जीवन से? जो अकाल काल के गले मिला। जिसको नभ में था विचरण करना, क्यों बंद कक्ष-छत तले मिला? क्या इतना विशाल संकट था? जो जीकर ना सुलझा पाया। अरे! इतनी भी क्या शर्म-अकड़? जो अपनो को ना बतलाया।  क्या जीवन से भारी कोई  जीवन में ही आँधी आई? इन छुट-मुट संकट के चक्कर में  मृत्यु ही क्यों मन भायी? हाँ हार गया हो भले मगर, हाँ कुछ ना मिला हो भले मगर, या जीत गया हो भले मगर, पर जीवन थोड़ी था हारा? अरे! हार जीत तो चलती रहती।  इस हार से ही क्यों अँधियारा ?

पाकिस्तान चले जाओ

_________________________________ पाकिस्तान चले जाओ गीत  हमारे प्यारे है, इन  गीतों को  तुम  दोहराओ। देशद्रोही बनने से पहले, दुष्टों थोड़ा तो घबराओ कई  मन्नतों के  बाद हमें, इक ऐसा  नेता  हाथ  लगा। देश की इज्जत के ख़ातिर, तुम अपने भी कर्तव्य निभाओ। "अच्छे दिन आएंगे" यह पंक्ति तुम बार बार दोहराओ। नाराज़ अगर सरकार से हो तो पाकिस्तान चले जाओ। संविधान की लाज रखी,अभिव्यक्ति की जहाँ छूट मिली। टीवी, पेपर और  मीडिया यहाँ बड़ी चिरकूट मिली। जहाँ देखो वहाँ जय जय होती, इक लब्ज़ विपरीत नहीं। जय हो तेरे भक्तों की चाचा, आशा बड़ी अटूट मिली। रोजगार के अवसर है अब ,पकोड़ों को सूची में लाओ। और नाराज़ अगर सरकार से हो तो पाकिस्तान चले जाओ। अच्छे अच्छे नेताओं के थे कार्टून  यूँ बनते। किसी की नाक लम्बी होती, किसी के हाथ तनते। पर अपने इन नेता जी की खबर है इतनी अच्छी। भारत का "फेंकू नंबर वन" है , छप्पन के सीने तनते। ये "मन की बात" बता देते है, तुम सुनने को चले आओ। नाराज़ अगर सरकार से हो तो पाकिस्तान चले जाओ। पहली बार ख़ुशी से रहने का मतलब मु

जय चित्तौड़(गीत)

'जय चित्तौड़' मैं  गाऊंगा तो, सारा शहर हिला दूंगा हाँ 'जय चित्तौड़' मैं  गाऊंगा तो, सारा विश्व हिला दूंगा दुश्मन जो अड़ जाए मुझसे , मिट्टी में मिला दूंगा हाँ मिट्टी में मिला दूंगा, उसे मिट्टी में मिला दूंगा 'जय चित्तौड़' मैं  गाऊंगा तो, सारा शहर हिला दूंगा x2 हाँ 'जय चित्तौड़' मैं  गाऊंगा तो, सारा विश्व हिला दूंगा।।1 ।। आन बान की बात जो आती , जान भी दाव लगा देते x2 अपनी इज़्जत के खातिर हम, अपना शीश कटा देते X2 हम तो है भारतवासी , न रुकते है, न झुकते है x2 ऊँगली उठी अगर किसी की,  दुनिया से उठा देते x2 उसे ऐसा मजा चखाउंगा, कि सब कुछ ही भुला दूंगा x2 हाँ 'जय चित्तौड़' मैं  गाऊंगा तो, सारा विश्व हिला दूंगा।।2।। मीरा बाई हुई जहाँ पर ,कृष्ण से इसको प्रीत लगी x2 छोड़ दिया घर बार था इसने, दुनिया से न प्रीत लगी x2 ज़हर का प्याला इसने पीया, डरी डरी सी कभी न रही x2 अंत में उससे जा मिली ,जिससे थी इसको प्रीत लगी x2 शक्ति और भक्ति की गाथा सबको मैं सुना दूंगा x2 हाँ 'जय चित्तौड़' मैं  गाऊंगा तो, सारा विश्व हिला दूंगा।।3।