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फ़रवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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Suicide Poem | By Hariram Regar

 आत्महत्या  क्या विषाद था तेरे मन में? क्यों लटक गया तू फंदे पर? जो औरों को कन्धा देता, क्यों आज है वो पर कंधे पर? क्या गिला रहा इस जीवन से? जो अकाल काल के गले मिला। जिसको नभ में था विचरण करना, क्यों बंद कक्ष-छत तले मिला? क्या इतना विशाल संकट था? जो जीकर ना सुलझा पाया। अरे! इतनी भी क्या शर्म-अकड़? जो अपनो को ना बतलाया।  क्या जीवन से भारी कोई  जीवन में ही आँधी आई? इन छुट-मुट संकट के चक्कर में  मृत्यु ही क्यों मन भायी? हाँ हार गया हो भले मगर, हाँ कुछ ना मिला हो भले मगर, या जीत गया हो भले मगर, पर जीवन थोड़ी था हारा? अरे! हार जीत तो चलती रहती।  इस हार से ही क्यों अँधियारा ?

Jai Mahakal || जय महाकाल || Hariram Regar

मैं सुबह-सवेरे साँझ-अँधेरे, तेरा ध्यान लगाता हूँ।  हे महाकाल! तेरे चरणों में अपना शीश झुकाता हूँ।   हे गरलधर! हे नीलकण्ठ! तुम पूरे विश्व विधाता हो।  राख-भभूति से लथपथ हो, भाँग के पूरे ज्ञाता हो।  गले में माला शेषनाग की, विष्णु के तुम भ्राता हो।  बड़ा सहारा भक्तों का हो, सब याचक तुम दाता हो।  सोच यही हर पल, हर क्षण, मैं जमकर धूम मचाता हूँ। हे महाकाल! तेरे चरणों में अपना शीश झुकाता हूँ।    हे जटाधारी, कैलाशपति! तुम सृष्टि के महानायक हो।  हे स्वरमयी महाकाल अनघ! तुम ताँडव के महागायक हो।  तुम गंगाधर, तुम चन्द्रशेखर, तुम त्रिअक्षी, तुम हो अक्षर।  हे शूलपाणि! हे उमापति! हे कृपानिधि! हे शिव शंकर! तेरे नाम अनेकों है जग में, उन नाम को मैं जप जाता हूँ।  हे महाकाल! तेरे चरणों में अपना शीश झुकाता हूँ।  हे व्योमकेश महासेनजनक! हे गौरीनाथ! हे पशुपति! हे वीरभद्र! हे पंचवक्त्र! हे मृत्युंजय! हे  पुरारति! हे वामदेव! हे सुरसूदन! हे भुजंगभूषण! हे भगवन! हे प्रजापति! हे शिव शम्भू! हे सोमसूर्यअग्निलोचन! हाँ तू है "हरि",  हूँ  मैं भी "हरि", पर अंतर जमीं व नभ का है।  इस धरा पे जब से आया हूँ म

अकेले मत आना (Akele Mat Aana) | By Hariram Regar

अकेले मत आना मनका खोजन-योजन तू , हर बार कूदता सागर में। तेरी श्वास फूलती दम घुटता, तू बाहर आता  पलभर में। अब धीरज रख और हिम्मत कर, इस बार तो गहरा ही जाना। हर बार लौटता खाली तू। इस बार तू खाली मत आना। इस बार अकेले मत आना ।। 1 ।।  जब लक्ष्य तुम्हारा चिड़ियाँ हो या लक्ष्य तुम्हारा मछली हो। तुम इसके सिवा  कुछ  ना देखो, यह कोशिश  तुम्हारी  असली हो। तुम अर्जुन ना बन पाओ तो भी, एकलव्य  ही बन जाना। हर बार चूक जाते हो तुम, इस बार सटीक ही बाण लगाना।  इस बार हारकर मत आना, इस बार अकेले मत आना ।। 2 ।। तू चींटी बन, तू बगुला बन। तू लक्ष्य के ख़ातिर पगला बन। तू कल को भूल और आज में जी। ना पिछले ग़म के आँसू पी। है आज की विपदा, कल का अवसर।  नहीं रुकते ये लम्बा अक़सर। अब तोते वाली छोड़ गुलामी। बन बाज़ अकेले  उड़ जाना।  हर बार लौटता खाली तू। इस बार सफ़लता संग लाना ।  इस बार जीत कर ही आना ।  इस बार अकेले मत आना  ।। 3 ।। ---Hariram Regar #SundayPoetry With Hariram Regar looking for pearls ,  Every time, you jump into the ocean.  Your breath suffocates, You come out in a moment.  Now be patient and have courage,  Thi

प्यारा मेरा गाँव (Pyaara Mera Gaanv) | By Hariram Regar

प्यारा मेरा गाँव  यहाँ कड़वी नीम-निंबौली है।  पर मीठी यहाँ की बोली है।  बचपन की यहाँ पे यारी है और पचपन की भी टोली है।  यहाँ  अपने सखा संग कान्हा है।  जिनके धूल से लथपथ पाँव है।  वो नन्हा मेरा गाँव है।  वो प्यारा मेरा गाँव है।।1।। इस गाँव में पतली गलियाँ है।  यहाँ कोमल कोमल कलियाँ है।  यहाँ खेतों में पगडण्डी है।  पेड़ों की छाया ठण्डी है।  शहरों की चमक-दमक से दूर, यहाँ अपनापन का भाव है।  वो नन्हा मेरा गाँव है।  वो प्यारा मेरा गाँव है।।2।। यहाँ होली है, दिवाली है।  चहुँ ओर बड़ी हरियाली है।  यहाँ कान्हा की भी गैय्या है, और यशोदा मैय्या है। यहाँ डाली-डाली झूले है। जहाँ बरगद की ठंडी छाँव है।  वो नन्हा मेरा गाँव है।  वो प्यारा मेरा गाँव है।।3।। यहाँ पणिहारिन का पनघट है।  और हैण्डपम्प की खटपट है।  यहाँ तुलसी घर-आँगन में है।  मेहमानी-भाव भी मन में है।  यह परिवारों का आँचल है।  जहाँ बड़ा ही आदर भाव है।   वो नन्हा मेरा गाँव है।  वो प्यारा मेरा गाँव है।।4।। यहाँ हुक्के वाली गुड़गुड़ है।  यहाँ वसन्त है, यहाँ पतझड़ है।  यहाँ मिट्टी से लीपा आँगन है।  दादा-दादी से शोभित प्राँगण है।  कमेन्ट में अब तुम भी बता