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Suicide Poem | By Hariram Regar

 आत्महत्या  क्या विषाद था तेरे मन में? क्यों लटक गया तू फंदे पर? जो औरों को कन्धा देता, क्यों आज है वो पर कंधे पर? क्या गिला रहा इस जीवन से? जो अकाल काल के गले मिला। जिसको नभ में था विचरण करना, क्यों बंद कक्ष-छत तले मिला? क्या इतना विशाल संकट था? जो जीकर ना सुलझा पाया। अरे! इतनी भी क्या शर्म-अकड़? जो अपनो को ना बतलाया।  क्या जीवन से भारी कोई  जीवन में ही आँधी आई? इन छुट-मुट संकट के चक्कर में  मृत्यु ही क्यों मन भायी? हाँ हार गया हो भले मगर, हाँ कुछ ना मिला हो भले मगर, या जीत गया हो भले मगर, पर जीवन थोड़ी था हारा? अरे! हार जीत तो चलती रहती।  इस हार से ही क्यों अँधियारा ?

उदास धरती माँ

उदास धरती माँ

तेरे चेहरे पे झलकती थी खूब ख़ुशी,
तू पहनती थी हरी साड़ी ख़ुशी ख़ुशी
आती थी तेरे तन से फूलों की बास
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

आम अमरुद बरगद बबूल सब कहा गए?
तेरे सारे अंग आज शिथिल कैसे पड़ गए?
यहां पर आज किसने किया है वास?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

तेरे ऊंचे ऊंचे पर्वतों के सर आज कैसे झुक गए?
चलती हुई नदियों के कदम आज कैसे रुक गए?
आज इन सरोवरों को क्यों लगी है प्यास?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

पहले हवा में महकती थी सुमनों की सुगंध
इसमें आज फैली है प्लास्टिक थैलियों की दुर्गन्ध
कहाँ कर गए तेरे सारे सुमन प्रवास?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

कैसे टूटा है यह  तेरा ओज़ोन कवच?
अब ये प्राणी कैसे पाएंगे बच?
जहाँ सूरज की गन्दी किरणों का फैला है त्रास। 
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

तेरे ध्रुव खण्ड आज क्यों पिघल रहे?
समुद्री पानी के कदम भूमि पर क्यों चल रहे?
क्यों हो रहा है इन बेचारे जीवों का नाश?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

कहाँ गयी तेरी हरे रंग की सारी?
क्यों हो रही आज तुझ पर बमबारी?
आज किसने किया है तुझको हताश?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

तेरी काया में इतना ज़हर किसने मिलाया है?
स्वच्छता से तेरा विश्वास किसने हिलाया है?
इन सभी का कोई कारण है क्या खास?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

तुझे आज कंगाल जिन्दगी क्यों पड़ी जीनी?
तेरे गर्भे छिपी स्वर्ण तिजोरी आज किसने छीनी?
तेरे सुखी क्षणों का आज किसने किया है विनाश?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

हे माँ! तेरी छाती पर मूंग कौन दल रहा है?
यहां इतनी भयंकर चालें कौन चल रहा है?
कौन कर रहा है तेरे साथ बकवास ?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

किसने तेरा ऐसा गंदा हुलिया बनाया है?
किस दुष्ट ने तेरी तरफ हाथ उठाया है?
बता मुझे कौन कर रहा है तेरा उपहास?
हे धरती माँ! आज क्यों है तू इतनी उदास?

हम तेरे पुत्र है खाते है आज कसम। 
तुझको पवित्र करेंगे तभी हम लेंगे दम
बहेगी फिर से ठंडी गंगा तेरे आस पास
हे धरती माँ! अब मत हो तू इतनी उदास

---By Hariram Regar



Udaas Dharati Maan


tere chehare pe jhalakatee thee khoob khushee,
too pahanatee thee haree sari khushee khushee.
aatee thee tere tan se phoolon kee baas.
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?
aam amarud baragad babool sab kaha gae?
tere saare ang aaj shithil kaise pad gae?
yahaan par aaj kisane kiya hai vaas?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

tere oonche oonche parvaton ke sar aaj kaise jhuk gae?
chalatee huee nadiyon ke kadam aaj kaise ruk gae?
aaj in sarovaron ko kyon lagee hai pyaas?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

pahale hava mein mahakatee thee sumanon kee sugandh.
isamen aaj phailee hai plaastik thailiyon kee durgandh.
kahaan kar gae tere saare suman pravaas?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

kaise toota hai yah tera ozon kavach?
ab ye praanee kaise paenge bach?
jahaan sooraj kee gandee kiranon ka phaila hai traas.
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

tere dhruv khand aaj kyon pighal rahe?
samudree paanee ke kadam bhoomi par kyon chal rahe?
kyon ho raha hai in bechaare jeevon ka naash?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

kahaan gayee teree hare rang kee saaree?
kyon ho rahee aaj tujh par bamabaaree?
aaj kisane kiya hai tujhako hataash?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

teree kaaya mein itana zahar kisane milaaya hai?
svachchhata se tera vishvaas kisane hilaaya hai?
in sabhee ka koee kaaran hai kya khaas?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?
tujhe aaj kangaal jindagee kyon padee jeenee?
tere garbhe chhipee svarn tijoree aaj kisane chheenee?
tere sukhee kshanon ka aaj kisane kiya hai vinaash?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?
he maan! teree chhaatee par moong kaun dal raha hai?
yahaan itanee bhayankar chaalen kaun chal raha hai?
kaun kar raha hai tere saath bakavaas ?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?

kisane tera aisa ganda huliya banaaya hai?
kis dusht ne teree taraph haath uthaaya hai?
bata mujhe kaun kar raha hai tera upahaas?
he dharatee maan! aaj kyon hai too itanee udaas?
ham tere putr hai khaate hai aaj kasam.
tujhako pavitr karenge tabhee ham lenge dam.
bahegee phir se thandee ganga tere aas paas.
he dharatee maan! ab mat ho too itanee udaas.
---By Hariram Regar

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